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किसी भी व्यक्ति
के समग्र विकास के लिए न केवल मानसिक बल्कि सामाजिक, शारीरिक
तथा भावात्मक विकास अत्यावश्यक है, जिसे शिक्षा को संस्कृति
के साथ जोड़कर तथा तेजी से बदलती तकनीकी के साथ कदम से कदम मिला
कर प्राप्त किया जा सकता है । शिक्षा को प्रभावकारी एवं
परिणाम अभिमुख बनाने हेतु यह आवश्यक है कि यह संस्कृति पर
आधारित हो और यह छात्रों की ज्ञानपरक, भावनात्मक तथा
आध्यात्मिक आवश्यकताओं को पूर्ण करने वाली हो ।
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शिक्षा और
संस्कृति दोनों एक-दूसरे से भिन्न नहीं हैं । दोनों का
उद्देश्य शिक्षा के माध्यमों द्वारा जीवन की गुणवत्ता में
सुधार लाना, विभिन्न विषयों का छात्रों को ज्ञान देना और उन्हें
सौन्दर्यपरक, नैतिक मूल्यों तथा विचार व क्रियात्मकता में
रचनात्मकता के द्वारा परिष्कृत व्यक्तित्व के विकास की ओर
प्रेरित करना है । |
राष्ट्रीय
शिक्षा नीति (1986) में संस्कृति आधारित शिक्षा की आवश्यकता
स्वीकार की गई है । विकासशील लोकतांत्रिक नागरिकता में शिक्षा
की भूमिका को मान्यता दी गई । लोकतांत्रिक विचारधारा में संस्कृति
का ज्ञान एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है । लोकतांत्रिक
नागरिक की पहचान उसकी झूठ से सत्य को बाहर निकालने की क्षमता
से की जाती है और वह नये विचारों को और अधिक ग्रहण करता है ।
सच्ची शिक्षा वैचारिक स्पष्टता, दया और मानव मात्र के प्रति
सेवा की भावना के साथ मानव अधिकारों का आधार भी है । |
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सेवारत शिक्षकों
के लिए प्रशिक्षण के महत्व पर भी बल दिया गया है ।
शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन किया जा सकता है यदि शिक्षक
प्रशिक्षित हों तथा शिक्षण की कार्य-प्रणालियों में परिवर्तनों
की आवश्यकता को समझने के लिए तैयार हों । चूंकि शिक्षक
प्रशिक्षण की अवधि नौ महीने तक ही सीमित है उससे शिल्प में
पारंगत शिक्षक तैयार करना सम्भव नहीं हो सकता । छात्रों को
भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराने के लिए
संग्रहालयों, स्मारकों तथा ऐतिहासिक महत्त्व के स्थलों के
भ्रमणों का आयोजन भी किया जाता है । अत: औपचारिक रूप से
पूर्णत: शिक्षित न होने पर भी शिल्पकारों को प्रशिक्षित
शिक्षकों के साथ शिल्प सिखाने की प्रक्रिया में जुड़ना चाहिए
या जोड़ा जाना चाहिए । |
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सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी),
का प्रमुख कार्य देश भर में सेवारत शिक्षकों के लिए विविध
प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना है ।
प्रशिक्षण द्वारा भारतीय कला एवं संस्कृति में निहित दर्शन,
सौन्दर्य शास्त्र और सुन्दरता की समझ एवं बोध प्राप्त होता है
और प्रशिक्षण पाठयक्रम की शिक्षा सांस्कृतिक घटक को समायोजित करने
के लिए कार्यप्रणलियों को तैयार करने पर बल दिया जाता है ।
यह प्रशिक्षण विज्ञान और प्रौद्योगिकी, गृह-व्यवस्था, कृषि,
खेलकूद आदि में संस्कृति की भूमिका पर भी बल दिया है ।
प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण अवयव पर्यावरण प्रदूषण की समस्या
को हल करने तथा प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और
परिरक्षण के प्रति छात्रों और अध्यापकों को उनकी भूमिका से
अवगत कराना है ।
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सांस्कृतिक
स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी), अपनेसमुदाय
तथा विस्तार सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत
विद्यालय और कॉलेज के छात्रों, अध्यापकों तथा गैर-सरकारी
स्वयंसेवी संगठनों द्वारा चलाए जाने वाले अनौपचारिक स्कूलों
में पढ़ने वाले झुग्गी-झोंपड़ी के छात्रों के लिए विविध
प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन करता है । इसमें
स्मारकों, संग्रहालयों, कला दीर्घाओं, शिल्प केन्द्र तथा
चिड़ियाघर, उद्यान की शैक्षिक यात्राएं कराई जाती है । साथ ही
प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक संपदा के संरक्षण पर शिविर, शिल्प
शिक्षण पर शिविर आयोजित किए जाते हैं । इन गतिविधियों द्वारा
छात्रों के बौद्धिक एवं सौन्दर्यपरक विकास पर बल दिया जाता है
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सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी), विदेशी
अध्यापकों और छात्रों के लिए भी भारतीय कला एवं संस्कृति पर
शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है । विभिन्न कलात्मक
गतिविधियों पर नाटक, संगीत, वर्णनात्मक कला माध्यमों आदि पर
कार्यशालाएंआयोजित की जाती हैं । इन
कार्यशालाओं द्वारा शिक्षकों को प्रोत्साहित किया जाता है कि
किस कला रूप पर कार्यक्रम तैयार करके उसे पाठयक्रम शिक्षण की
पढ़ाई में उपयोग में लाया जा सकता है । |
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वर्षों से सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र
(सीसीआरटी),आलेखों, रंगीन स्लाइडों, छाया चित्रों, ऑडियो और
वीडियो रिकॉडिंगों तथा फिल्मों के रूप मेंस्रोतों
का संग्रह कर रहा है । प्रति वर्ष सीसीआरटी
की प्रलेखन टीम ग्रामीण भारत के कला और शिल्प-रूपों को पुन:
जीवित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से देश के विभिन्न
भागों में कार्यक्रम आयोजित करती है जिन्हें देश के छात्र तथा
शिक्षक समुदाय में भारतीय संस्कृति का प्रसार करने हेतु
शैक्षिक कार्यक्रमों का निर्माण के लिए उपयोग में लाया जाता है
। कुछ सांसाधन सामग्री का उपयोग सीसीआरटी के शिक्षण प्रशिक्षण
कार्यक्रमों के दौरान किया जाता है । इन्हें
(सांस्कृतिक किट) सह-सामग्री के रूप में नि:शुल्क उन
विद्यालयों में वितरित किया जाता है, जिनके शिक्षिकों ने
सीसीआरटी से प्रशिक्षण प्राप्त किया है ।
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सीसीआरटी ऐसे
प्रकाशन भी तैयार करता है जो भारतीय कला तथा
संस्कृति के विभिन्न पहलुओं के प्रति समझ और सराहना की भावना
उत्पन्न करते हैं । ये प्रकाशन सांस्कृतिक
अभिव्यक्तियों पर पारिस्थितिकी के प्रभाव के प्रति समझ
उत्पन्न करने हेतु कलात्मक अभिव्यक्तियों एवं प्रकृति के
प्रभाव पर भी प्रकाश डालते हैं ।
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सांस्कृतिक
स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक
प्रतिभा खोज छात्रृवत्ति योजनाको
कार्यान्वित करना है । इस योजना के अन्तर्गत 10-14
वर्ष आयु वर्ग के उत्कृष्ट प्रतिभाशाली बच्चों को
छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है ताकि मान्यता प्राप्त
विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र अथवा पारम्परिक प्रदर्शन
या अन्य कलाओं से सक्रिय रूप से जुड़े परिवारों के बच्चे,
विशेष रूप से दुर्लभ होती कला शैलियों तथा विविध सांस्कृतिक
क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा को विकसित कर सके । |
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सांस्कृतिक
स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी), ने सीसीआरटी
शिक्षक पुरस्कारकी स्थापना भी की है,
जिसे प्रतिवर्ष कुछ चुने हुए अध्यापकों को शिक्षा तथा संस्कृति
के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने के लिए सम्मान स्वरूप
दिया जाता है । |
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भूमण्डलीकरण और उभरती नई तकनीको के कारण प्रत्येक स्तर पर व्यावसायिक
शिक्षाविदों की नई माँगें बढ़ रही है ।
केन्द्र द्वारा व्यापक वितरण तथा विश्व भर में शहरी व ग्रामीण
स्तरों पर अध्यापकों तथा छात्रों द्वारा देखने के लिए सांस्कृतिक
सॉफ्टवेयर
तैयार किया जा रहा है । ये मॉडयूल शिक्षा तथा संस्कृति
पर कार्य करने वालों के लिए सम्बंधित विषयों को लेकर तैयार किए गए
हैं । भारतीय कला और संस्कृति पर अधिकांश वीडियो प्रोडक्शन्स और
कार्यक्रम सी0डी0 रोम्स के रूप में उपलब्ध हैं । केन्द्र
को विश्व सांस्कृतिक पटल पर प्रस्तुत करने के प्रयास में इसी
प्रकार के अन्य संगठनों के साथ विश्वव्यापी स्तर पर नेटवर्किगं
प्रणाली स्थापित की गई है । इसमें विशाल और व्यापक भारतीय संस्कृति
की सूची है । सूचना तथा जानकारी के समृद्ध साधन तक पहुंचने के लिए
केन्द्र एक ऑन लाइन कल्चरल डाटा नेटवर्क सेवा विकसित कर रहा है ।
केन्द्र कला और संस्कृति के क्षेत्र में विशेषज्ञों के मध्य आए
भौगोलिक अन्तर अथवा दूरी को मिटाने के लिए वीडियो कान्फ्रेंस सेवा
का उपयोग करने की योजना भी बना रहा है ताकि केन्द्र के प्रशिक्षण
कार्यक्रमों का अधिक विस्तार और विकास हो सकें ।
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संस्कृति मंत्रालय भारत
सरकार
के प्रशासनिक नियंत्रण के
अधीन
15 ए, सैक्टर-7, द्वारका,नई
दिल्ली-110075 |
सांस्कृतिक स्रोत एवं
प्रशिक्षण केन्द्र |
दूरभाष नं0 (011) 25088638,
47151000
फैक्स 91-11-25088637
ग्राम-सनकल्ट
ई-मेल dg.ccrt@nic.in |
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