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सूचना का अधिकार अधिनियम
परिचय
सांस्कृतिक स्रोत एवं
प्रशिक्षण केन्द्र एक अग्रणी
संगठन है, जो शिक्षा को संस्कृति
के साथ जोड़ने का कार्य कर रहा है
। इसकी स्थापना मई,1979 में भारत
सरकार द्वारा एक स्वायत्त संगठन
के रुप में की गई थी । संस्कृति
मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण
के अधीन इस केन्द्र का मुख्यालय
नई दिल्ली में है । इसके तीन
क्षेत्रीय केन्द्र हैं, जो भारतीय
कला और संस्कृति के व्यापक
प्रचार-प्रसार हेतु पशिचम में
उदयपुर, राजस्थान, दक्षिण में
हैदराबाद, आन्ध्र प्रदेश तथा
पूर्वोत्तर में गुवहाटी, असम में
स्थित हैं ।
सीसीआरटी निम्नलिखित योजनाओं के
द्वारा संस्कृति को शिक्षा से
जोड़ने के अपने मुख्य उद्धेश्य
हेतु सतत् प्रयत्नशील है:-
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1. |
कॉलेज एवं स्कूल छात्रो
के मध्य संस्कृति का
प्रचार-प्रसार
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2. |
सांस्कृतिक प्रतिभा खोज
छात्रवृत्तियोजना |
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कॉलेज और स्कूल छात्रों के मध्य
संस्कृति के प्रचार-प्रसार की
योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों
के बीच भारत की क्षेत्रीय
संस्कृतियों की बहुलता के विषय
में विवेक व जागृति उत्पन्न कर
शिक्षा प्रणाली का नवोन्मेष करना
तथा इस ज्ञान को शिक्षा से जोड़ता
है । सांस्कतिक प्रतिभा-खोज
छात्रवृत्ति योजना का लक्ष्य
प्रतिभाशाली बालक- बालिकाओं को
विभिन्न कलात्मक क्षेत्रों में
अपनी प्रतिभा विकसित करने के लिए
सुविधाऍं उपलब्ध कराना है । इस
छात्रवृत्ति की पात्रता- श्रेणी
में वे बच्चे आते हैं, जिनकी आयु
10 से 14 वर्ष के बीच है और जो
मान्यता प्राप्त विद्यालयों में
पढ़ रहे हैं अथवा पारम्परिक कला
शैलियों पर जीवनयापन करने वाले
परिवारों से संबंधित हैं ।
सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण
केन्द्र ने छात्रों को भारतीय
समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की गहन
जानकारी प्राप्त करने में उन्हें
उत्प्रेरित करने के उद्देश्य से
स्कूलों में सांस्कृतिक क्लब की
स्थापना करने की योजना अपने हाथ
में ली है। छात्र विविध शिक्षण
संकायों एवं ज्ञानार्जन संबंधी
गतिविधियों में भाग लेते हैं,
जैसे – पारम्परिक कला शैलियों के
अध्ययन में प्रायोगिक कौशल,निबंध
और चित्रकारी प्रतियोगिताएं, वाद
विवाद और नाट्य कार्यशालाएं,
क्षेत्रीय भाषाओं में गीत सीखना,
राष्ट्रीय एवं ऐतिहासिक स्थलों का
शैक्षिक भ्रमण आदि ।
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मुख्य कार्य
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1. |
शिक्षकों/ शिक्षिकाओं के
लिए भारतीय संस्कृति पर
शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित
करना ।
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2. |
विद्यालयी-पाठ्यक्रम में
शिल्पकलाओं को समाहित
करने के लिए व्यवहारिक
प्रशिक्षण व ज्ञान की
कार्यशालाऍं आयोजित करना
।
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3. |
अपने देश की क्षेत्रीय
विविधता तथा सांस्कृतिक
समृद्धि संबंधी जागृति के
लिए नाटक, संगीत, आख्यान,
शास्त्रीय नृत्य इत्यादि
विविध गतिविधियों के विषय
में कार्यशालाऍं आयोजित
करना ।
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4. |
इसके समुदाय तथा विस्तार
पुनर्निवेशन कार्यक्रम के
अन्तर्गत सरकारी और
गैर-सरकारी संगठनों से
संबंधित विद्यालयों में
छात्रों/छात्राओं,
शिक्षक/शिक्षिकाओं और
बालकों/बालिकाओं के लिए
विभिन्न शैक्षिक
कार्यकलापों का आयोजन
करना, ताकि प्राकृतिक व
सांस्कृतिक विरासत के
संरक्षण के प्रति जागृति
उत्पन्न की जा सके ।
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5. |
C लिपियों, कलर स्लाइडों,
छायाचित्रों,
श्रव्य-दृश्य रिकार्डिंग
और फिल्मों के रुप में
स्रोंतों को एकत्रित
करना, ताकि भारत के कला
और शिल्प-रूपों को पुन:
जीवित और प्रोत्साहित
किया जा सके ।
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6. |
ऐसे प्रकाशन तैयार करना,
जिनके माध्यम से भारतीय
संस्कृति के विभिन्न
पक्षों की समझ पैदा हो
तथा उनका रसास्वादन किया
जा सके ।
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7. |
सांस्कृतिक प्रतिभा खोज
छात्रवृत्ति योजना के तहत
श्रेष्ठ बालक-बालिकाओं,
जिनकी आयु 10-14 वर्ष के
बीच है, को विभिन्न
कलात्मक क्षेत्रों में
अपनी प्रतिभा विकसित करने
के लिए सुविधाएं प्रदान
कराना ।
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संस्कृति मंत्रालय भारत
सरकार
के प्रशासनिक नियंत्रण के
अधीन
15 ए, सैक्टर-7, द्वारका,नई
दिल्ली-110075 |
सांस्कृतिक स्रोत एवं
प्रशिक्षण केन्द्र |
दूरभाष नं0 (011) 25088638,
47151000
फैक्स 91-11-25088637
ग्राम-सनकल्ट
ई-मेल dg.ccrt@nic.in |

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