सांस्कृतिक
प्रतिभा खोज छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य प्रतिभावान बालक/बालिकाओं
को विभिन्न कलात्मक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा विकसित करने
के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना है । इस छात्रवृत्ति की पात्रता
श्रेणी में वे बच्चे आते हैं, जिनकी आयु निर्धारित जन्म
तिथियों के अनुसार 10 से 14 वर्ष के बीच है और जो मान्यता
प्राप्त विद्यालयों में पढ़ रहें, अथवा पारम्परिक कला शैलियों
पर जीवन यापन करने वाले परिवारों से सम्बंधित हैं ।
वर्ष 1982 में
सीसीआरटी ने संस्कृति मंत्रालय से प्राप्त कर, सांस्कृतिक
प्रतिभा खोज छात्रवृत्ति योजना संचालित करनी आरम्भ की, जिसमें
देश के सभी भागों से कला और शिल्पों से जुड़े 100 छात्रों की
पहचान की गई । देश की विशालता एवं प्रतिभा की उपलब्धता को देखते
हुए वर्ष 1984 से छात्रवृत्ति की संख्या 100 से बढ़ाकर 300
प्रतिवर्ष कर दी गई ।
वर्तमान में सीसीआरटी प्रत्येक वर्ष 500 नई
छात्रवृत्तियां प्रदान कर रहा है जिनमें से कम से कम
05 छात्रवृत्तियां प्रत्येक राज्य के लिए और 03
छात्रवृत्तियां प्रत्येक संघ शासित प्रदेश के लिए
आरक्षित हैं । कम से कम 10 छात्रवृत्तियां जम्मू और
कश्मीर राज्य के लिए भी आरक्षित है । छात्रवृत्ति
प्रदान करते समय पारम्परिक कला शैलियों से जुड़े
परिवारों के बच्चों को वरियता दी जाती है । विशेष बल
उन दुर्लभ कलाओं और शिल्पों पर दिया जाता है जो विलुप्त
होती जा रही है ।
चयन का आधार :-
छात्रवृत्ति हेतु निर्धारित जन्म तिथियों के
अनुसार 10 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के ऐसे छात्रों
को चयन किया जाता है जो या तो मान्यता प्राप्त
स्कूलों में पढ़ रहे होते हैं अथवा पारम्परिक,
निष्पादन एवं अन्य कलाओं से जुडे परिवारों
से सम्बंध रहते हैं । विविध सांस्कृतिक क्षेत्रों
जैसे संगीत, नृत्य, नाटक, चित्रकारी, मूर्तिकला
तथा शिल्प कलाओं की पारम्परिक शैलियों आदि में
उत्कृष्ट बच्चों को छात्रवृर्ति हेतु चुना जाता
है । विशेष बल उन कला शैलियों पद दिया जाता है
जो धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है ।
संस्कृति मंत्रालय भारत
सरकार
के प्रशासनिक नियंत्रण के
अधीन
15 ए, सैक्टर-7, द्वारका,नई
दिल्ली-110075